किसी को अगर यह वहम है कि बाबा साहब को संविधान लिखने का काम सौंपकर किसी ने उन पर एहसान किया था तो वे गलतफहमी में हैं. भारत जैसे जटिल देश का संविधान उन्होंने इसलिए लिखा क्योंकि संविधान सभा में उनसे आधा पढ़ा लिखा भी कोई नहीं था. डिग्रियां तो उनके पास सबसे ज्यादा और सबसे बेहतरीन थीं ही.
किसी
को अगर यह वहम है कि बाबा साहब को संविधान लिखने का काम सौंपकर किसी ने उन
पर एहसान किया था तो वे गलतफहमी में हैं. भारत जैसे जटिल देश का संविधान
उन्होंने इसलिए लिखा क्योंकि संविधान सभा में उनसे आधा पढ़ा लिखा भी कोई नहीं था. डिग्रियां तो उनके पास सबसे ज्यादा और सबसे बेहतरीन थीं ही.
स्वतंत्र भारत का संविधान बनाने में डॉ. आंबेडकर ने जो कठिन और
विद्वत्तापूर्ण कार्य किया उसकी समीक्षा टी.टी. कृष्णमाचारी ने संविधान सभा
के समक्ष इस प्रकार की:
"अध्यक्ष महोदय, संविधान सभा में से मैं एक
हूँ जिसने डॉ आंबेडकर को बहुत सावधानीपूर्वक सुना है. मैं उस परिश्रम और
उत्साह को जानता हूँ जिससे उन्होंने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार किया
है. मैं यह महसूस करता हूँ कि जो ध्यान भारतीय संविधान के निर्माण में दिया
जाना अनिवार्य था वह ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा नहीं दिया गया. संविधानसभा
शायद यह जानती है कि आपके द्वारा मनोनीत सात सदस्य थे. उनमें से एक ने
संविधानसभा से त्यागपत्र दे दिया और उस रिक्त स्थान की पूर्ति कर दी गई. एक
सदस्य की मृत्यु हो गई और उनका स्थान नहीं भरा गया. एक अमेरिका चला गया और
स्थान खाली रहा. एक और सदस्य राजकीय कार्यों में व्यस्त रहा और उसका स्थान
भी खाली रहा. एक या दो सदस्य दिल्ली से बाहर रहे और शायद स्वास्थ्य के
कारण उपस्थित नहीं हो सके. हुआ यह कि संविधान-निर्माण का भार डॉ आंबेडकर के
कन्धों पर आ पड़ा. इसमें मुझे कोई संदेह नहीं कि जिस ढंग से उन्होंने
संविधान निर्माण का कार्य किया है उसके लिए हम कृतज्ञ हैं...!"
साभार : नीलाक्षी सिंह
"अध्यक्ष महोदय, संविधान सभा में से मैं एक हूँ जिसने डॉ आंबेडकर को बहुत सावधानीपूर्वक सुना है. मैं उस परिश्रम और उत्साह को जानता हूँ जिससे उन्होंने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार किया है. मैं यह महसूस करता हूँ कि जो ध्यान भारतीय संविधान के निर्माण में दिया जाना अनिवार्य था वह ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा नहीं दिया गया. संविधानसभा शायद यह जानती है कि आपके द्वारा मनोनीत सात सदस्य थे. उनमें से एक ने संविधानसभा से त्यागपत्र दे दिया और उस रिक्त स्थान की पूर्ति कर दी गई. एक सदस्य की मृत्यु हो गई और उनका स्थान नहीं भरा गया. एक अमेरिका चला गया और स्थान खाली रहा. एक और सदस्य राजकीय कार्यों में व्यस्त रहा और उसका स्थान भी खाली रहा. एक या दो सदस्य दिल्ली से बाहर रहे और शायद स्वास्थ्य के कारण उपस्थित नहीं हो सके. हुआ यह कि संविधान-निर्माण का भार डॉ आंबेडकर के कन्धों पर आ पड़ा. इसमें मुझे कोई संदेह नहीं कि जिस ढंग से उन्होंने संविधान निर्माण का कार्य किया है उसके लिए हम कृतज्ञ हैं...!"
साभार : नीलाक्षी सिंह
