Friday, July 18, 2014



मेरे जिन भाईयो में अपने
मुक्तिदाता का उपकार समझने
की बुद्धि होगी वो अवश्य समझेंगे
शेयर करेगे और इस तरफ ध्यान भी देगे
कि बाबा साहेब ने क्या कहा था अपने
अन्तिम समय में "
नानक चन्द रत्तू:- 31जुलाई 1956,
मंगलवार को मैँ सायं 5.30 बजे डाक
की गठरी लिए बाबा साहेब के पास पहुँचा वे
बरामदे मे स्टूल पर गद्दी रखकर अपने पैर
टिकाए बैठे थे और उन्होने सिर कुर्सी की बैक
पर टिका रखा था। उनका थका मांदा चेहरा मैँ
चुपचाप देखता रहा और थोड़ी देर बाद
बाबा साहेब जाग गए। जल्दी जल्दी पत्रो के
उत्तर लिखवा कर मेरे कंधे का सहारा लेते हुए
सोने के कमरे मे गए और तुरँत लेट गए। एक
सवाल काफी दिनोँ से मेरे मन मे हलचल
मचा रहा था। पर मेरी हिम्मत नही पडती थी।
क्योँकि बाबा साहेब
का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फटता था।
मैँने साहस बटोरकर अर्से से मन मे
दबा प्रशन पूछ ही लिया, "सर,आजकल आप
बहुत दुखी और हताश क्योँ दिखते हो,? बीच
बीच मेँ रो भी पड़ते हो,क्षमा करेँ, पर बताएँ
जरुर...।" कुछ क्षणोँ की चुपी तोड़ते हुए वे
उद्विग्न हो उठे और भावुकता के कारण
आवाज रुँध गई और कहा, "तुम नही जानते
कि मुझे किस बात का गम है और किन
कारणोँ से मैँ इतना दुखी हूँ।
पहली चिँता तो मुझे यह है कि मै अपने जीवन
मे अपना मिश्न पूरा नही कर पाया। मै अपने
जीवन मे अपने लोगोँ को शासक वर्ग के रूप
मे देखना चाहता था जहाँ वे राजनीतिक
शक्ति के हिस्सेदार बने। मै तो लगभग अपंग
और बीमारी के कारण बिस्तर से लग गया हूँ।
मै तो चाहता था पढे लिखे लोग मेरे मिशन
को आगे बढाऐँगे ।मै जो कुछ कर सका उससे
पढे लिखे लोग मौज उडा रहे हैँ अशिक्षित
ग्रामीणो की हालत ज्योँ की त्योँ बनी हुई है।
लगता है मेरा जीवन थोड़ा ही बचा है। मै
तो चाहता था बहुजनोँ मे से कोई आगे आए
और मेरे आंदोलन को आगे बढाने
की जिम्मेदारी ले पर मुझे ऐसा कोई
नही दिखता पढे-लिखे और राजनेता जिन पर
मैने भरोसा किया था कि वे मिशन को आगे
बढाऐँगे वे नेतृत्व और शक्ति के लिए आपस
मे लड़ रहे है। लंबी सांस लेते हूए और
गीली आँखो से आँसू पोँछते हुए बाबा साहब ने
कहा, "नानकचंद मेरे
लोगोँ को बता देना कि जो कुछ मैने
किया है ,वह अपने विरोधियो की चारोँ और से
गालियाँ ,विरोधियोँ से संघर्ष और कुचलकर
रख देने वाली बाधाओँ से गुजरकर कर पाया हूँ
। मै बहुत मुश्किल से इस
कारवाँ को यहाँ तक लाया हूँ । यह
कारवाँ आगे ही बढते रहना चाहिए। चाहे
कितनी ही बाधाएँ, रुकावटेँ, परेशानियाँ क्योँ न
आएं। रत्तू मेरे लोग यदि इस कारवाँ को आगे
नही ले जा सकते तो इसे यहीँ रहने दे
किसी भी हालत मे पीछे न जाने देँ।
जाओ मेरे लोगो से कह दो।
जाओ मेरे लोगो से कह दो।
जाओ मेरे लोगो से कह दो, नानक चन्द
ऐसा तीन बार कहकर बाबा साहेब फूट-फूट
कर रोने लगे।
उन्होंने हमेशा बहुजन समाज (85%=SC/
ST/OBC/Minority) के लिए "मेरे लोग"
शब्द का प्रयोग किया। फिर भी हम उनके
कितने आदर्शो को मानते हैं??
Think About it!!!!!

jay bhim jay bharat.

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