Thursday, May 2, 2013


Tarsem Singh Bains "@ 'सावित्री बाई फुले' ने देश में अपने 'क्रन्तिकारी' समाज सुधार के कार्यों दुयारा, 'नारी जगत' में एक 'महान आदर्श' स्थापित किया / उनका ‘जीवन’ एक ऐसा ‘जलता’ हुआ 'मशाल' है जिसकी, 'अलौकिक' रौशनी में 'भारतीय नारी' ने सब से पहले, समाज के अन्दर 'स्वैमान' के साथ 'जीना' सिखा तथा दूसरों के लिए एक 'आदर्श' बनीं / 'सावित्री बाई' के महान कार्यों से 'भारतीय नारी' के आदिकाल से 'पाँव' में डाली हुईं 'गुलामी की जंजीरें' टुकड़े टुकड़े हो गईं / यह 'सावित्री बाई' के, ना 'डगमगाने' वाले 'हौंसले' तथा 'महान कार्यों' का ही 'परिणाम' है कि, आज 'भारतीय नारी', 'आजाद' होकर 'खुली हवा' में 'सांस' लेने में 'सक्षम' हुई है तथा 'मर्दों' के बराबर हर क्षेत्र में 'तरक्की' के राह पर चल रही है / " .......................... डॉ . बी . आर . आंबेडकर

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